हनुमानजी की वाणी रामजी
की भक्ति और प्रताप से तथा तेज और बल से सनी हुई थी । जिसे सुनकर माता सीता के मन
में बहुत संतोष हुआ । और हनुमानजी को राम जी का प्रिय जानकर सीताजी ने आशीर्वाद
दिया कि हे तात ! आप बल और शील के भंडार हो जाओ ।
सीताजी ने कहा कि हे पुत्र आप अजर और अमर हो जाओ
तथा गुणों के भंडार हो जाओ । अर्थात आपको बुढ़ापा और मृत्यु कभी सपर्श न करे (हनुमानजी
महाराज को बुढ़ापा स्पर्श नहीं कर सकती, वे हमेशा युवा ही रहते हैं । इसलिए
हनुमानजी के युवा स्वरूप का ही पूजन करना चाहिए । और युवा स्वरूप का चित्र आदि घर
में रखना चाहिए ) । सीताजी ने आगे कहा कि आप पर रामजी बहुत कृपा करें ।
हनुमानजी महाराज जैसे संत को, भक्त को रामजी की
कृपा ही चाहिए होती है । इसलिए बल, शील के भंडार होने का वरदान सुनकर हनुमानजी को
ज्यादा प्रसन्नता नहीं हुई । इसी तरह अजर, अमर और गुणनिधि होने का वरदान सुनकर भी
ज्यादा प्रसन्नता नहीं हुई ।
लेकिन रामजी आप पर कृपा करें यह वरदान कान से
सुनते ही हनुमानजी पूर्ण प्रेम में मग्न हो गए । हनुमानजी ने बार-बार सीताजी को
प्रणाम किया-शीश नवाया और हाथ जोड़कर बोले कि हे माता अब मैं कृतार्थ हो गया । आपका
आशीर्वाद अमोघ है । अर्थात कभी निष्फल नहीं हो सकता । यह बाद प्रसिद्ध है यानी हर
कोई इसे जानता है ।
रामजी बहुत कृपा करें ऐसा अमोघ आशीर्वाद जिसे
मिल जाय उसके लिए फिर क्या शेष रह जाता है ? रामजी की कृपा के लिए ही लोग नाना जतन
करते हैं । घर छोड़कर विरागी बनते हैं । जप-तप करते हैं । सच में जीवन का अभीष्ट
यही है कि रामजी की कृपा हो जाए । जिस पर रामजी की कृपा हो जाती है उसे सभी
साधु-सुर-सज्जन की कृपा प्राप्ति हो जाती है । जिस पर रामजी कृपा करते हैं उससे
कभी भी मुँह नहीं फेरते ।
जिस पर राम जी की कृपा हो जाती है उस पर राम
जी कृपा कभी कम नहीं करते । उत्तरोत्तर उनकी कृपा उस पर बढ़ती ही जाती है-‘जासु
कृपा नहि कृपा अघाती’ । ऐसा राम जी का स्वभाव है ।
चूँकि राम जी की कृपा ही
जीवन का लक्ष्य है । और इसे प्राप्त करने के बाद कुछ भी पाना शेष नहीं रह जाता
इसलिए हनुमानजी महाराज को यह आशीर्वाद (तीन आशीर्वादों में से तीसरा-१. बल और शील
का भंडार हो जाइए, २. अजर, अमर और गुणनिधि हो जाइए, ३. रामजी आप पर बहुत कृपा करें
) बहुत भाया कि राम जी आप पर बहुत कृपा करें ।
।। जय श्रीहनुमान ।।
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