राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।

Thursday, January 15, 2026

सुन्दरकाण्ड भाग-१८- सीताजी को हनुमानजी का पर्वताकार रूप दिखाना

 

हनुमानजी महाराज ने कहा कि यदि भगवान श्रीराम को खबर मिल गई होती तो वे देर नहीं करते । अर्थात अब तक राम जी के यहाँ न आने का एक मात्र कारण यह है कि उनको अब तक आपकी खबर ही नहीं लगी कि आप कहाँ हो ? और वे निरंतर आपकी खोज में लगे हैं ।

 

 हनुमानजी महाराज ने कहा कि हे माता जानकी राम वाण रुपी सूर्य के उदित होते ही अधंकार रुपी राक्षसी सेना का पता नहीं चलेगा । अर्थात हे माता जैसे सूर्य के उदित होने से रात्रि का अंधकार समाप्त हो जाता है । ठीक वैसे ही राम जी के वाण रुपी सूर्य से राक्षसों की सेना रुपी अंधकार समाप्त हो जाएगा । 

 

  हनुमानजी महाराज ने कहा कि हे माता मैं आपको अभी अपने साथ लेकर चलता लेकिन रघुनाथ जी की सपथ है, मुझे ऐसी आज्ञा नहीं मिली है । अर्थात राम जी ने ऐसा करने को नहीं कहा है । उन्होंने सिर्फ आपका कुशल समाचार लाने को कहा है, आपको लाने की आज्ञा नहीं दिया है । इसलिए हे माता आप कुछ दिन और धैर्य धारण कीजिए । वानरों के साथ रामजी यहाँ आयेंगे । और राक्षसों को मारकर आपको यहाँ से ले जाएँगे । नारद आदि ऋषि-मुनि रामजी का यश तीनों लोकों में गाएँगे ।

 

सीताजी ने हनुमानजी से कहा कि हे पुत्र सभी वानर तुम्हारे जैसे ही होंगे अर्थात जैसे छोटे आप हो ऐसे ही अन्य वानर भी होंगे । लेकिन राक्षस बड़े बलवान योद्धा हैं । इसलिए मेरे मन में संदेह हो रहा है कि छोटे-छोटे वानर इन बड़े-बड़े बलवान राक्षस योद्धाओं को कैसे जीतेंगे ?

 

ऐसा सुनकर सीताजी को धैर्य और विश्वास दिलाने के लिए हनुमानजी ने अपना शरीर प्रगट किया । हनुमानजी का शरीर सोने के पर्वत के आकार की थी । अर्थात सुमेरु पर्वत जैसे लग रही थी । जो युद्ध में भयंकर दिखने वाली (विपक्षी योद्धाओं में भय उत्पन्न करने वाली ) अत्यंत बल और बीरता से युक्त थी । हनुमान जी के ऐसे रूप को देखकर सीता जी को भरोसा हुआ कि समर क्षेत्र में अवश्मेव वानर राक्षसों पर भारी पड़ेंगे । और तब हनुमानजी ने फिर से वही छोटा सा रूप धारण कर लिया ।

 

हनुमानजी महाराज ने सीताजी से कहा कि हे माता सुनिए वानरों में न ही बहुत बल होता है और न ही उनके बहुत वुद्धि ही होती है । लेकिन रामजी की कृपा से बहुत छोटा सा साँप भी गरुड़ को खा सकता है ।

 

अर्थात यदि रामजी की कृपा हो तो निर्बल और वुद्धिहीन भी बड़ा बलवान और वुद्धिमान बन जाता है । और राम जी के कृपा के बिना बड़ा से बड़ा बलवान और वुद्धिमान भी निर्बल और मूर्ख बन जाता है ।  गरुड़ जी में बड़ा बल है और वे बड़े-बड़े सर्प (जैसे कालिय नाग) को सहज ही मार सकते हैं । लेकिन राम जी के प्रताप से छोटा सा साँप भी गरुड़ को मार सकता है ।

 

अतः हे माता आप अपने मन में किसी भी तरह का संशय न कीजिए । क्योंकि भले ही राक्षस बड़े बलवान और योद्धा हैं और बड़े-बड़े युद्ध जीते भी हैं । यहाँ तक देवताओं को भी जीत लिया है । लेकिन वानरों पर राम जी की कृपा है । इसलिए वानर भले ही बल और वुद्धि हीन समझे जाते हों फिर भी राम जी के प्रताप से हम राक्षसों को परास्त करने में अवश्य ही सफल होंगे ।

 

।। जय श्रीसीताराम ।।

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