राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।

Saturday, September 16, 2023

हनुमानजी द्वारा इंद्र, इंद्रवज्र और राहु आदि का मान भंग

 

हनुमानजी पालने में लेटे हुए थे  उन्होंने उगते हुए सूर्य को देखा ।  सूर्यदेव  बहुत ही आकर्षक लग रहे थे । हनुमानजी सूर्य देव की ओर बढ़ चले । हनुमानजी सूर्य के ताप से आहत न हों इसलिए पवन देव वर्फ के समान शीतल होकर हनुमानजी के साथ हो लिए ।

 

  इस दिन अमावस्या की तिथि थी । सूर्यग्रहण का दिन था । हनुमानजी सूर्यदेव के पास पहुँचकर सूर्यदेव को अपने मुख में रख लिया । इधर राहु सूर्य को अपना ग्रास बनाने आ रहा था । उसे कुछ समझ में नहीं आया कि यह कौन और कहाँ से आ गया है । इस धीर बीर बलवान को जन्म किसने दिया होगा ? जब हनुमानजी के आगे उसकी एक न चली तो वह भागकर इंद्र के पास पहुँचा । इधर तीनों लोकों में अँधियारी छा गई थी । किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था –


बाल समय मुख धरेउ तमारी । छाई लोक सकल अँधियारी ।।  

 

 इंद्र राहु की सहायता करने के लिए आए । इंद्र ने हनुमानजी के ऊपर इंद्र वज्र से प्रहार किया । जो हनुमानजी की टोडी से टकराया । जिससे इंद्र के वज्र के दांत टूट गए । इस प्रकार इंद्र, इंद्र वज्र और राहु आदि का मान भंग हो गया-

 

देंह तुम्हारी वज्र समान । तोड्यो इंद्र वज्र का मान ।।  

 

  इंद्र की ऐसी धृष्टता देखकर पवन देव कुपित हो गए । सारे संसार को दुखी देखकर व्रह्मादि सभी देव गण पवनदेव और हनुमानजी की विनती करने लगे । और हनुमानजी को अनेकानेक वरदान देकर मनाने लगे । जिससे हनुमानजी ने सूर्य देव को छोड़ दिया और तीनों लोकों में फिर से उजियारी छा गई । सभी लोग सुखी हो गए-

देवन आनि करी विनती तब छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो ।

- संकटमोचन हनुमानाष्टक ।

विनय सुनत लखि लोक दुखारी । छाड़ेउ रवि फैली उजियारी ।।

- विनयावली ।

 

राहु जो सोच रहा था कि यह कौन और कहाँ से आ गया और इस धीर वीर बलवान को जन्म देने वाली माता कौन है ? उसे अब तक अपने प्रश्न का उत्तर मिल चुका था –

 

अंजना को लाल लाल बाल रवि खायो है ।

सोचै मन राहू ऐसो कौन वीर जायो है ।।१।। 

 

रवि बिनु तिहुँपुर घोर तम छायो है ।

सुर मुनि काहू कछु समझ न आयो है ।।२।।

 

एको जब नाहिं चली जाइ गोहरायो है ।

चलेउ सुरेश सब बहु घबरायो है ।।३।।

 

कुलिश को दाँत मान गयो चलायो है ।

टूट्यो नहीं हनु हनुमान जग छायो है ।।४।।

 

सुर सब विधि संग विनय सुनायो है ।

वर देय देय पवन-पूत रिझायो है ।।५।।

 

दीन संतोष फिरि जग सुख छायो है ।

महावीर बलवान अंजना को जायो है ।।६।।

 

।। वज्रांगबली हनुमानजी की जय ।।

 

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