राम प्रभू के निकट सनेही । दीन मलीन प्रनत जन नेही ।।
अघ अवगुन छमि होउ सहाई । संतोष मिलैं जेहिं श्रीरघुराई ।।

Saturday, April 12, 2025

जय बजरंगबली हनुमान । दीनबंधु अतुलित बलवान


 ।। श्री हनुमते नमः ।।

जय बजरंगबली हनुमान । 

दीनबंधु अतुलित बलवान ।।१।।


रामदूत तुम महिमावान । 

देते दीन हीन को मान ।।२।।


देंह तुम्हारी बज्र समान । 

तोड़्यो इंद्र बज्र को मान ।।३।।


भरत लखन सीता के प्रान । 

राखे जनपालक जन त्रान ।।४।।


श्रीरघुनाथ चरन सुख मान । 

सेवत राखत जन मन आन ।।५।।


साधु संत रक्षक हितवान । 

रामकथा रस रसिक सुजान ।।६।।


सुर नर मुनि तेरे गुणगान । 

करते शिव अज हरि भगवान ।।७।।


सिधि निधि देत विशुध विज्ञान । 

राम रसायन धन धनवान ।।८।।


खल-दल तम को सूर्य समान । 

गुन बल धाम विगत अभिमान ।।९।।


दीन मलीन नहीं कछु ज्ञान । 

कृपा करो हे कृपानिधान ।।१०।।


रामसनेही दयानिधान । 

हर लो सब अवगुण अज्ञान ।।११।।


दीन हीन प्रभु निज जन जान । 

दीन संतोष करो कल्यान ।।१२।।

 

।। बजरंगबली हनुमानजी की जय ।।

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